नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘गर्भिणी मित्र’ नाम का छह महीने का ऑफलाइन कौशल पाठ्यक्रम शुरू किया है। आयुष मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति के अनुसार इसका उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवधि में स्वास्थ्य शिक्षा, जीवनशैली मार्गदर्शन और सामुदायिक सहायता देने वाले प्रशिक्षित कर्मी तैयार करना है।
पाठ्यक्रम में तिमाही के अनुसार आहार संबंधी जानकारी, जीवनशैली, गर्भावस्था में सुरक्षित योग, प्रसव के समय भावनात्मक सहयोग, नवजात मालिश और बुनियादी जीवन-रक्षक प्रोटोकॉल का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल बताया गया है। संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट और कार्यस्थल सुरक्षा भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। प्रत्येक बैच में 20 विद्यार्थियों का प्रवेश और 10+2 तथा न्यूनतम 18 वर्ष की पात्रता निर्धारित की गई।
संस्थान ने स्पष्ट किया है कि यह सहायता नियमित प्रसवपूर्व नैदानिक देखभाल का पूरक है, विकल्प नहीं। रक्तचाप, हीमोग्लोबिन और चिकित्सकीय जांच जारी रहनी चाहिए। रक्तस्राव, तेज सिरदर्द, दृष्टि में बदलाव, सांस की कठिनाई, सूजन, दौरा, भ्रूण की गति कम लगना या कोई तेजी से बिगड़ता लक्षण हो तो प्रशिक्षित सहायक को स्वयं उपचार करने के बजाय तत्काल योग्य चिकित्सक और स्वास्थ्य केंद्र को रेफर करना चाहिए।
ऐसे पाठ्यक्रम का प्रभाव प्रशिक्षण गुणवत्ता, स्पष्ट कार्य-सीमा, पर्यवेक्षण और रेफरल व्यवस्था से तय होगा। दूरस्थ हिमाचली क्षेत्रों में सामुदायिक सहायता उपयोगी हो सकती है, लेकिन प्रसूति विशेषज्ञ, एंबुलेंस और संस्थागत देखभाल की उपलब्धता का स्थान नहीं ले सकती। यह लेख व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह नहीं है। चित्र वास्तविक गर्भवती महिला या संस्थान का नहीं, प्रशिक्षण कक्षा का प्रतिनिधि दृश्य है।






