भारत की संगठित अंतरिक्ष यात्रा 1962 में INCOSPAR की स्थापना और 1963 में थुंबा से पहले साउंडिंग रॉकेट के प्रक्षेपण से शुरू हुई। आज कार्यक्रम प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान जैसे बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है।

नई तकनीकों में पुन:प्रयोग योग्य प्रक्षेपण यान, विद्युत और हरित प्रणोदन तथा कक्षा में उपग्रहों की सर्विसिंग शामिल हैं। SpaDeX के जरिए भारत ने दो अंतरिक्ष यानों की स्वचालित डॉकिंग क्षमता प्रदर्शित करने वाले देशों में स्थान बनाया।

अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग संचार, कृषि, मौसम पूर्वानुमान, आपदा आकलन और पर्यावरण निगरानी में हो रहा है। निजी कंपनियों और स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी इस पारिस्थितिकी तंत्र में नए अनुप्रयोग और सेवाएं जोड़ रही है।