मणिपुर विश्वविद्यालय की NSS इकाई और MY Bharat ने 27 अगस्त को खेलो इंडिया संवाद आयोजित किया। खेल मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति के अनुसार देशभर के करीब 450 कॉलेज और विश्वविद्यालय कार्यक्रम से जुड़े, जबकि मणिपुर से 11 कॉलेज और विश्वविद्यालय शामिल हुए। संवाद में खेल बुनियादी ढांचे और प्रतिभा विकास पर विद्यार्थियों तथा खिलाड़ियों ने विचार रखे।

कार्यक्रम में पांच से 15 वर्ष के बच्चों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय प्रतिभा पहचान पहल का उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने गांव और स्कूल स्तर पर सही खेल की पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, प्रशिक्षित कोच, उपकरण, पोषण और नियमित प्रतियोगिता अवसर की जरूरत बताई। प्रस्ताव और सार्वजनिक संबोधन लागू योजना, चयन मानदंड या बजट स्वीकृति के बराबर नहीं हैं।

स्थानीय प्रतिनिधियों ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के खिलाड़ियों को उपकरण, भोजन, यात्रा और प्रशिक्षण खर्च में आने वाली कठिनाइयां रेखांकित कीं। योजनाओं में पारदर्शिता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चुने खिलाड़ियों को समय पर वित्तीय सहायता की मांग उठी। मणिपुर के 19 ओलंपियनों का उल्लेख भी सार्वजनिक भाषण में किया गया।

हिमाचल के दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभा पहचान तभी उपयोगी होगी जब चयन प्रक्रिया खुली हो और खिलाड़ी को उम्रानुकूल प्रशिक्षण, सुरक्षित यात्रा, शिक्षा तथा दीर्घकालिक सहायता मिले। किसी बच्चे को बहुत जल्दी एक खेल में बाध्य करना उचित नहीं होगा। चित्र वास्तविक मणिपुर कार्यक्रम का नहीं, प्रशिक्षकों के साथ बहु-खेल प्रशिक्षण का प्रतिनिधि दृश्य है।