छत्तीसगढ़ में रोपाई के करीब 45 दिन या उससे अधिक पुरानी धान फसल को देखते हुए ICAR-National Institute of Biotic Stress Management ने कीट निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। कृषि मंत्रालय की PIB विज्ञप्ति के अनुसार मौसम लीफ फोल्डर और अगली फसल अवस्था में पीले तना छेदक के अनुकूल हो सकता है, जबकि वर्तमान वृद्धि संतोषजनक बताई गई है।

संस्थान ने किसानों से पत्तियों और पौधों का नियमित निरीक्षण कर शुरुआती लक्षण पहचानने को कहा। सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह है कि केवल दिखाई देने वाले कुछ कीटों के आधार पर अनावश्यक कीटनाशक न छिड़का जाए। नियंत्रण उपाय तब अपनाए जाएं जब कीट आबादी निर्धारित आर्थिक क्षति सीमा तक पहुंचे, ताकि लागत और पर्यावरणीय नुकसान सीमित रहें।

समेकित कीट प्रबंधन में नियमित निगरानी, यांत्रिक उपाय, जैविक नियंत्रण, प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण और जरूरत के अनुसार चयनित कीटनाशक शामिल हैं। असामान्य या गंभीर प्रकोप दिखने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने को कहा गया। उत्पाद, मात्रा और प्रतीक्षा अवधि फसल तथा स्थानीय पंजीकरण के अनुसार ही तय होनी चाहिए।

यह सलाह विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की उस समय की धान अवस्था के संदर्भ में जारी हुई; हिमाचल के किसान इसे सीधे न अपनाएं। प्रदेश में ऊंचाई, रोपाई समय, किस्म और मौसम अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से पुष्टि जरूरी है। चित्र किसी वास्तविक खेत का नहीं, विशेषज्ञ के साथ कीट निरीक्षण का प्रतिनिधि दृश्य है।