भारत में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों का रामसर नेटवर्क 2014 के 26 स्थलों से बढ़कर 103 हो गया है। ये स्थल 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं।
आर्द्रभूमियां मीठे पानी को संचित करने, भूजल पुनर्भरण, बाढ़ के प्रभाव को कम करने और मत्स्य पालन व खेती से जुड़ी आजीविका को सहारा देने में महत्वपूर्ण हैं। वे प्रवासी पक्षियों और अनेक प्रजातियों के लिए भी आवश्यक आवास उपलब्ध कराती हैं।
भारत 1982 में रामसर कन्वेंशन का पक्षकार बना था। सरकारी संरक्षण कार्यक्रमों में वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ स्थानीय भागीदारी पर जोर है, ताकि इन संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों की दीर्घकालीन सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।







