सौर और पवन ऊर्जा बढ़ने के साथ बिजली को उस समय के लिए सुरक्षित रखना जरूरी हो रहा है, जब उत्पादन कम और मांग अधिक हो। पंप्ड स्टोरेज परियोजना में अतिरिक्त बिजली से पानी निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में भेजा जाता है और जरूरत पड़ने पर वही पानी टरबाइन से गुजारकर फिर बिजली बनाई जाती है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 2031-32 तक 73.93 गीगावाट ऊर्जा भंडारण की जरूरत का अनुमान लगाया है। इसमें 26.69 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज और 47.24 गीगावाट बैटरी भंडारण शामिल है। दोनों तकनीकें अलग भूमिकाएं निभाती हैं—बैटरी त्वरित और कम अवधि की जरूरत संभालती है, जबकि पंप्ड स्टोरेज लंबी अवधि में बड़ी मात्रा की ऊर्जा स्थानांतरित कर सकता है।
देश में 320 संभावित पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं चिन्हित हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 345.38 गीगावाट बताई गई है। उत्तर क्षेत्र की पहचान की गई क्षमता 50.32 गीगावाट है और इसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। जुलाई 2026 तक भारत की स्थापित पंप्ड स्टोरेज क्षमता 7.43 गीगावाट पहुंच चुकी थी।







