मैसूरु के दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित शिल्प समागम मेला पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को सीधे खरीदारों तक पहुंचाने का मंच बना है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने मेले का दौरा कर स्टॉल संचालकों और आगंतुकों से बातचीत की। मंत्रालय के अनुसार आयोजन उसके अधीन तीन राष्ट्रीय निगमों की साझेदारी में किया गया है, जो पात्र कारीगरों और लाभार्थियों को वित्तीय सहायता देते हैं।
मेले में कुल 83 स्टॉल हैं, जिनमें 80 कारीगरों को आवंटित किए गए हैं। इनमें 37 महिला कारीगर शामिल हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के प्रतिभागी हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियां, मसाले, शहद उत्पाद, लकड़ी के खिलौने, चमड़े का सामान और टेराकोटा जैसी वस्तुएं प्रदर्शित कर रहे हैं।
मंत्रालय ने कहा कि कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल के साथ यात्रा, दैनिक भत्ता, सामान ढुलाई और भोजन के लिए निर्धारित सहायता दी जाती है। आयोजन का उद्देश्य ग्राहक आधार बढ़ाना, पारंपरिक कौशल को बाजार देना और टिकाऊ आजीविका के अवसर बनाना है। मंत्रालय 2022 से ऐसे 13 मेले आयोजित कर चुका है, जिनसे 975 कारीगर जुड़े हैं; मैसूरु संस्करण वित्त वर्ष 2026-27 का पहला शिल्प समागम है।







